गीत
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गीत
साजन अब तो आओ ना
मुझको यूँ तड़पाओ ना |
विरह- वेदना की अग्नि से,
और हमें झुलसाओ ना।
आँगन सुना, देहरी सुनी
तुम्हरे बिन अब जिंदगी सुनी,
दिल की सुखी बगिआ को
आके अब महकाओ ना।
बदरा घिरी आवे है जब-जब,
हुक जिआ से निकले तब -तब,
विरहन सी भटकी मैं वन -वन
आके राग वसंती गाओ ना।
दर्पण भी जाने है हाल,
पायल, बिदिंया करे सवाल,
मेरे बुझे तन -मन को,
अपने हाथों से सजाओ ना।
साजन अब तो आओ ना,
मुझको यूँ तड़पाओ ना।
(संजय कु सिंह)
पटना
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