Posts

Showing posts from October, 2020

डायरी के पन्ने

 डायरी के पन्ने    कुछ अधूरी गज़ले थी, कुछ सूखे गुलाब थे, मेरे डायरी के पन्नो पर.  कितने सारे ख़्वाब थे.  निगाहों के सवाल थे, निगाहों के जवाब थे पुरे दिन की बाते थी, रातों के हिसाब थे. मन कहीं तो और था, पर हाथों में किताब थे दोस्त मेरे कम ही थे, जो भी थे नायब थे. संजय सिंह  23 /10 2020   

हाथरस का सच

                                                         हाथरस का सच   हाथरस की घटना से पूरा देश मर्माहत है।  पीड़िता की  अस्मिता के साथ खेलने वाले और उसकी जान लेने वाले को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए।  भारतीय कानून में निर्भया कांड के बाद जो परिवर्तन हुए हैं, उसको देखते हुए यह कहना गलत होगा कि दोषियों को किसी तरह की राहत की गुंजाईश होगी। लाख कोशिशों के बावजूद निर्भया कांड के सभी अभियुक्तों को अंत में फांसी पर लटकना ही पड़ा। हाथरस की घटना को यदि गौर से देखा जाये तो यह प्रतीत होता है कि इसमें कुछ निर्दोष लोगों को भी फंसाया गया है।जिस तरह से पीड़िता का पहला बयान है,उसमे केवल एक अभियुक्त का नाम लिया गया। बाद में उसकी माँ का बयान भी पीड़िता के बयान से मिलता हुआ लगा। घटना की प्रारम्भिक रिपोर्ट पीड़िता के भाई के द्वारा थाने में दर्ज कराई गयी ,उसमे भी एक अभियुक्त के अलावा किसी और का नाम नहीं है। उस रिपोर्ट में भी बलात्कार...