स्वतंत्रता के मायने
स्वतंत्रता के मायने
कोरोना काल का दौर हमें इस शब्द के बेहद करीब ला रहा है। अपने आप को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए हमें कई पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले तक हमारे जीवन में जितनी स्वतंत्रता थी ,उतनी आज नहीं है। लोगों के अंदर की बेचैनियां स्पष्ट दृष्टिगोचर है।
स्वाभाविक रूप से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि गुलाम भारत में लोगों की क्या स्थिति रही होगी। पढ़ने,लिखने, बोलने और जीवन जीने के तमाम तरीकों पर अंग्रेजों ने पाबंदियां लगा रखी थी। छोटी छोटी गलतियों के लिए लोगों को पुलिस और अंग्रेजों के पिठ्ठुओं के बर्बरता का सामना करना पड़ता था।
आज जिस स्वतंत्रता का आनंद हमलोग उठा रहे हैं, इसको पाने के लिए हमारे पूर्वजों ने अनगिनत कुर्बानियां दी है।
जरूरत है इसके महत्व को समझने की। केवल 15 अगस्त को तिरंगा झंडा फहरा देने भर से हमारी भूमिका समाप्त नहीं हो जाती है।
हमें अपने अधिकार के साथ साथ कर्तव्यों का भी भलीभांति निर्वहन करना हैं। हमारी वजह से दूसरों की स्वतंत्रता में भी बाधा नहीं आनी चाहिए। बोलना अगर आजादी है तो चिल्लाना दुरुपयोग। लिखना अगर आजादी है तो अनर्गल प्रलाप उसका दुरुपयोग। सड़कों पर चलना अगर आजादी है तो ट्रैफिक नियमों का पालन न करना उसका दुरूपयोग है।
इस तरह की तमाम छोटी छोटी बातों का अगर हम ख्याल रखें तो हमारी अपनी स्वतंत्रता के साथ साथ दूसरों की स्वतंत्रता का भी आदर कर सकते हैं, और जिस तरह से हमारे पूर्वजों ने हमें स्वतंत्रता दी उसी तरह से हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी एक खूबसूरत विरासत सौंपने का अपना धर्म निभा सकते हैं।
जय हिन्द जय भारत 
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