चुनौती


चुनौती 

चुनौती चाहें बड़ी हो कितनी, उसको तुम स्वीकार करो,
लड़ो शेर की भांति ,बढ़ो आगे और वार करो। 

इस मिट्टी की कसम है तुमको, कदम नहीं रुकने देना,
कट जाये शीश कोई बात नहीं,शीश नहीं झुकने देना। 

जन जन के प्यारे हो तुम जन जन को तुम प्यार करो,
चुनौती चाहे बड़ी हो कितनी, उसको तुम स्वीकार करो।

सारे खेत खलिहान तुम्हारे,
पुरखों के निशान तुम्हारे,
खोई शक्ति प्राप्त करो तुम,
सारे तीर कमान तुम्हारे। 

गिरे हुए को गले लगा लो, उनका तुम उद्धार करो,
चुनौती चाहे बड़ी हो कितनी, उसको तुम स्वीकार करो।


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चक्रव्यूह को भेदना सीखो,
लाक्षागृह से बचना सीखो।
अगर लक्ष्य को पाना है तो ,
कष्टों को भी सहना सीखो। 

हिमालय सा हौसला लेकर हर बाधा  को  पार करो ,
चुनौती चाहे बड़ी हो कितनी,उसको तुम स्वीकार करो।

नहीं युद्ध उन्मादी हो तुम,
पर लड़ने के आदि हो तुम,
इतिहास के पन्ने पलटो,
कितने अनंत अनादि हो तुम। 

नई चेतना जागृत करके, ऊर्जा का संचार करो, 
चुनौती चाहे बड़ी हो कितनी ,उसको तुम स्वीकार करो। 

ज्वालामुखी सा फूट पड़ो,
कहर बनकर तुम टूट पड़ो,
सौ पर एक तुम भारी हो,
संकल्पशक्ति से जुट पड़ो।

दुश्मन चाहे बड़ा हो कितना, उसका तुम प्रतिकार करो,
चुनौती चाहे बड़ी हो कितनी,उसको तुम स्वीकार करो 

प्रेम की भाषा पढ़ लेना,
सौंदर्य के किस्से गढ़ लेना,
संग अपने तुम प्रियतम के,
जीवन पथ पर बढ़ लेना, 

आने वाले हर पल को, दिल से तुम अंगीकार करो,
चुनौती चाहे बड़ी हो कितनी,उसको तुम स्वीकार करो। 

सुविधाओं में पलने वाले, राह नहीं दिखाते हैं,
संघर्षों में जीने वाले, इतिहास रच जाते हैं ,
जिसने धर्म की रक्षा हेतु, सुखों का बलिदान किया,
युगों युगों तक ऐसे लोग, जननायक बन जाते हैं। 

युगपुरुष ऐसे लोगों का,सदा तुम जयकार करो,
चुनौती चाहे बड़ी हो कितनी, उसको तुम स्वीकार करो,
लड़ो शेर की भांति ,बढ़ो आगे और वार करो।
                                                                                          

✎(संजय कुमार सिंह)
    पटना  


 

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