गजल

गजल

सूरज  को निकलते देखो,
फुलों को खिलते  देखो,

फिर भी दिल उदास हो,
किसी बच्चे को मचलते देखो।

आँखो के इशारे से हीं सही,
जमी हुई बर्फ को पिघलते देखो।

जिसकी रोशनी से रौशन हो रहे हो तुम
उस चराग को जलते देखो।

फिक्र सताती रही जिसे  तुम्हारी 
जरा उस उम्र को ढलते  देखो।







 

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