जिंदगी
जिंदगी
टूटे ख्वाबो को फिर से सीए जा रहा हूँ,
मजेे जिंदगी के लिए जा रहा हूँ।
सुन सुन कर सबकी दिल भर गया है,
मन की अब अपनी किए जा रहा हूँ।
नफरत की ऊँची दिवारों से हटकर
पैगामे मोहब्बत दिए जा रहा हूँ।
देर से हीं सही मंजिल मिलेगी जरूर,
थामे उम्मीदों का दामन जिए जा रहा हूँं।
छलके जो बाहर तो अफसाने बनेंगे,
अश्कों को अंदर पिए जा रहा हूँ।

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